सामाजिक विज्ञान/राजव्यवस्था – कक्षा 11 – Ncert अध्याय 5 – विधायिका – पार्ट 2 : Political Science/Constitution NCERT Based Questions Part 2 For UPSC, IAS, RAS, State PCS

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Indian Polity/Indian Constitution/Political Science Questions in Hindi


प्रश्न 11:- निम्नलिखित कथनों पर ध्यानपूर्वक विचार करें-
1. किसी भी विधेयक पर दोनों सदनों में मतभेद की स्थिति पैदा होने पर लोक सभा अध्यक्ष द्वारा संयुक्त बैठक आहूत की जा सकती है।
2. धन विधेयक के सम्बन्ध में राज्य सभा उसे या तो स्वीकार कर सकती है या संशोधन प्रस्तावित कर सकती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (a)
व्याख्याः संविधान के #अनुच्छेद108 के तहत किसी विधेयक (धन विधेयक या संविधान संशोधन विधेयक को छोड़कर) पर दोनों सदनों में मतभेद की स्थिति पैदा होने पर राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त बैठक आहूत की जा सकती है जिसकी अध्यक्षता लोक सभा अध्यक्ष करता है। अतः कथन (1) असत्य है। धन विधेयक को राज्य सभा या तो स्वीकार कर सकती है या संशोधन प्रस्तावित कर सकती है, लेकिन धन विधेयक को अस्वीकार नहीं कर सकती है। यदि राज्य सभा 14 दिन तक विधेयक पर निर्णय नहीं लेती है तो उसे राज्य सभा से भी पारित माना जाएगा।


प्रश्न 12:- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये-
1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 109 में धन विधेयक सम्बंधी प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है।
2. किसी भी विधेयक को सदन में प्रस्तुत करने से पूर्व राष्ट्रपति की स्वीकृति लेनी होती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (a)
व्याख्याः #संविधानकेअनुच्छेद109 में धन विधेयक सम्बंधी प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है तथा संविधान के अनुच्छेद 110 में धन विधेयक को परिभाषित किया गया है। कोई भी विधेयक दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति मिल जाने पर ही कानून बनता है। धन विधेयकों तथा किसी राज्य के राज्यक्षेत्र, नाम व सीमाओं में परिवर्तन सम्बन्धी विधेयकों को ही राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से सदनों में प्रस्तुत किया जाता है। अतः कथन (1) सत्य व कथन (2) असत्य है।


प्रश्न 13:- संसदीय विशेषाधिकार के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये-
1. सदन में कुछ भी कहने के बावजूद किसी सदस्य के विरुद्ध कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती।
2. इसके हनन की स्थिति में सदन के अध्यक्ष को अन्तिम निर्णय लेने की शक्ति प्राप्त है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
A) केवल1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः(c)
व्याख्याः दिये गए दोनों कथन सत्य हैं। संविधान के अनुच्छेद-105 में #संसदीय_विशेषाधिकार के संबंध में उपबंध किया गया है।


प्रश्न 14:- संसद की कार्यवाही के दौरान किस काल में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देने के लिये मंत्री बाध्य नहीं हैं?
A) प्रश्न काल
B) शून्यकाल
C) a व b दोनों
D) न तो a और न ही b

उत्तरः (b)
व्याख्याः संसद के अधिवेशन के समय प्रतिदिन प्रश्न काल में मंत्रियों को तीखे प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। #शून्यकाल में सदस्य किसी भी महत्त्वपूर्ण मुद्दे को उठा सकते हैं, पर मंत्री उसका उत्तर देने के लिये बाध्य नहीं हैं।


प्रश्न 15:- निम्नलिखित कथनों पर ध्यानपूर्वक विचार करें-
1. सरकारी कार्यक्रमों को लागू करने के लिये वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था बजट के द्वारा की जाती है।
2. संसदीय स्वीकृति के लिये बजट बनाना और उसे पेश करना सरकार की संवैधानिक ज़िम्मेदारी है।
3. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और संसद की लोक-लेखा समिति की रिपोर्ट के आधार पर विधायिका धन के दुरुपयोग के मामलों की जाँच कर सकती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य नहीं है/हैं?
A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 3
D) उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तरः (d)
व्याख्याः दिये गए सभी कथन सत्य हैं। संविधान के अनुच्छेद 112 में #वार्षिक_वित्तीय विवरण (बजट) के संबंध में प्रावधान है। सरकार के कार्यक्रमों को लागू करने के लिये वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था, बजट के द्वारा की जाती है। संसदीय स्वीकृति के लिये बजट बनाना और उसे पेश करना सरकार की संवैधानिक ज़िम्मेदारी है। इसी ज़िम्मेदारी के कारण विधायिका को कार्यपालिका के ‘खजाने’ पर निंयत्रण करने का अवसर मिल जाता है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और संसद की लोक-लेखा समिति की रिपोर्ट के आधार पर धन के दुरुपयोग के मामलों की जाँच कर सकती है। लेकिन संसदीय नियंत्रण का एकमात्र उद्देश्य सरकारी धन के सदुपयोग को सुनिश्चित करना नहीं होता, वित्तीय नियंत्रण द्वारा विधायिका सरकार की नीतियों पर भी नियंत्रण करती है।


प्रश्न 16:- संसदीय समितियों के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें-
1. ये समितियाँ कानून बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
2. ये सदन के दैनिक कार्यों में कोई भूमिका नहीं निभाती हैं।
3. समितियाँ केवल सदन के अधिवेशन के समय ही कार्यरत रहती हैं।
4. ये समितियाँ विभिन्न विभागों के द्वारा किये गए खर्चों की जाँच, भ्रष्टाचार के मामलों की पड़ताल आदि करती हैं।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
A) केवल 1 और 4
B) केवल 1, 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) केवल 1, 3 और 4

उत्तरः (a)
व्याख्याः #संसदीय_समितियाँ कानून बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ सदन के दैनिक कार्यों में भी भूमिका निभाती हैं। अतः कथन (1) सत्य व (2) असत्य है। समितियाँ सदन का अधिवेशन होने या न होने दोनों ही स्थितियों में कार्यरत रहती हैं। अतः कथन (3) असत्य है। ये समितियाँ विभिन्न विभागों के द्वारा किये कार्यों की जाँच, भ्रष्टाचार के मामलों की पड़ताल करती हैं। अतः कथन (4) सत्य है।


प्रश्न 17:- निम्नलिखित कथनों पर ध्यानपूर्वक विचार करें-
1. स्थायी समितियों के अतिरिक्त, संयुक्त संसदीय समितियों का भी महत्त्वपूर्ण स्थान है।
2. संयुक्त समितियों में लोक सभा के सदस्य ही होते हैं।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 व 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (a)
व्याख्याः #स्थायी_समितियों के अतिरिक्त संयुक्त संसदीय समितियों का भी महत्त्वपूर्ण स्थान है। इन समितियों में दोनों सदनों के सदस्य मौजूद होते हैं।


प्रश्न 18:- निम्नलिखित कथनों पर विचार करें-
1. संविधान में संसद की कार्यवाही को सुचारु ढंग से संचालित करने सम्बन्धी प्रावधानों का उल्लेख नहीं है।
2. सदन का अध्यक्ष विधायिका की कार्यवाही के मामलों में सर्वोच्च अधिकारी होता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 व 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (b)
व्याख्याः संविधान में संसद की कार्यवाही को सुचारु ढंग से #संचालित करने सम्बन्धी प्रावधानों का स्पष्ट उल्लेख है। अतः कथन (1) असत्य है। सदन का अध्यक्ष विधायिका की कार्यवाहियों के मामलों में सर्वोच्च अधिकारी होता है।


प्रश्न 19:- दलबदल सम्बन्धित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये-
1. यदि कोई सदस्य अपने दल के नेतृत्व के आदेश के बावजूद सदन में उपस्थित न हो या निर्देशन के विपरीत मतदान करे या स्वेच्छा से दल की सदस्यता से त्यागपत्र दे देता है तो इसे दलबदल कहते हैं।
2. दलबदल विवादों पर अन्तिम निर्णय सदन के अध्यक्ष का होता है।
3. 52वें संविधान संशोधन के माध्यम से दलबदल निरोधक कानून लाया गया।
4. दलबदल सिद्ध होने पर उक्त सदस्य की सदन में सदस्यता समाप्त हो जाती है साथ ही उस व्यक्ति को किसी भी राजनैतिक पद हेतु भी अयोग्य घोषित कर दिया जाता है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
A) केवल 1 और 4
B) केवल 1, 2 और 3
C) केवल 2 और 4
D) उपरोक्त सभी।

उत्तरः (d)
व्याख्याः
#52वें_संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 के द्वारा दलबदल निरोधक कानून लाया गया।
91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के द्वारा इस कानून को और सशक्त बनाया गया।
दलबदल विवादों का निर्णय सदन के अध्यक्ष/सभापति द्वारा किया जाता है।

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