सामाजिक विज्ञान/राजव्यवस्था – कक्षा 11 – Ncert अध्याय 2 -भारतीय संविधान में अधिकार – पार्ट 2 : Political Science/Constitution/Indian Polity NCERT Based Questions Part 6 For UPSC, IAS, RAS, State PCS

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Indian Polity/Indian Constitution/Political Science Questions in Hindi


प्रश्न 16:- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये।
1. लोक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के आधार पर सरकार धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगा सकती है।
2. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार सीमित है अर्थात् सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिये सरकार इन पर प्रतिबंध लगा सकती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (d)
व्याख्याः दिये गए दोनों कथन सत्य हैं। लोक व्यवस्था, #नैतिकता और स्वास्थ्य के आधार पर सरकार धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगा सकती है, क्योंकि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार असीमित नहीं है। सामाज में व्याप्त बुराईयों-मानव बलि, सती प्रथा, बाल विवाह व बहु विवाह जैसी कुरीतियों पर प्रहार करने हेतु अनेक कदम उठाए गए हैं। सरकार द्वारा/विधि द्वारा उठाए गए इन कदमों को स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। संविधान ने सभी को अपने धर्म का प्रचार-प्रसार करने की स्वतंत्रता दी है। संविधान धर्मांतरण भय व लालच दिखाकर या जबरन धर्म परिवर्तित कराने की इजाज़त नहीं देता है। संविधान हमें केवल अपने धर्म की सूचनाओं का प्रसार करने की स्वतंत्रता देता है जिससे लोग स्वतः उसकी ओर आकर्षित हो एवं उसका अन्तःकरण कर सकें।


प्रश्न 17:- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये।
1. भारत का कोई राजकीय धर्म नहीं है।
2. राज्य द्वारा सहायता प्राप्त किसी भी संस्थान में किसी धर्म विशेष को बढ़ावा देने संबंधी कोई गतिविधियाँ नहीं की जा सकती।
3. किसी भी सार्वजनिक पद को किसी धर्म विशेष के लिये आरक्षित नहीं किया जा सकता।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) उपरोक्त सभी

उत्तरः (d)
व्याख्याः दिये गए सभी कथन सत्य हैं। संविधान की #उद्देशिका में भारत की धार्मिक विविधता का सम्मान करते हुए स्पष्ट शब्दों में पंथनिरपेक्षता को अपनाया गया है।


प्रश्न 18:- अल्पसंख्यकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये।
1. किसी समुदाय को केवल धर्म ही नहीं बल्कि भाषा और संस्कृति के आधार पर भी अल्पसंख्यक माना जाता है।
2. अपनी संस्कृति को सुरक्षित और विकसित करने के लिये भाषाई/धार्मिक अल्पसंख्यकों को अपने शिक्षण संस्थान खोलने का अधिकार प्राप्त है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (c)
व्याख्याः दिये गए दोनों कथन सत्य हैं। #अल्पसंख्यक वह समूह है जिनकी अपनी एक भाषा या धर्म होता है और देश के क्षेत्र विशेष या सम्पूर्ण देश में अन्य वर्गों/समूहों की जनसंख्या की अपेक्षाकृत अत्यन्त छोटा समूह होता है।
संविधान के अनुच्छेद 29 में अल्पसंख्यक वर्गों के हितों के संरक्षण हेतु विशेष प्रावधान किये हैं। वहीं अनुच्छेद 30 के अन्तर्गत अल्पसंख्यक-वर्गों को अपनी भाषा या धर्म के विकास के लिये शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अधिकार प्राप्त है।


प्रश्न 19:- संवैधानिक उपचारों के अधिकार के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये-
1. डॉ. अम्बेडकर ने इस अधिकार को ‘संविधान का हृदय और आत्मा’ की संज्ञा दी है।
2. इसके अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को मूल अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में पहले केवल उच्च न्यायालय जाने का अधिकार है उसके बाद वे सर्वोच्च न्यायालय भी जा सकते हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (a)
व्याख्याः सिर्फ कथन (1) सत्य है। अनुच्छेद-32 #संवैधानिक_उपचारों के अधिकार को डॉ. अम्बेडकर ने संविधान का ‘हृदय एवं आत्मा’ की संज्ञा दी है, किंतु सामान्य रूप से संविधान की आत्मा और हृदय ‘प्रस्तावना/उद्देशियका’ को कहा जाता है।
संवैधानिक उपचारों के अधिकार के तहत मूल अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में सभी नागरिकों को सीधे सर्वोच्च न्यायालय/उच्च न्यायालय दोनों में से कहीं भी पहले जाने का अधिकार प्राप्त है। अतः कथन (2) असत्य है।


प्रश्न 20:- किसी गिरफ्तार व्यक्ति को न्यायालय के सामने प्रस्तुत करने हेतु न्यायालय कौन-सी रिट जारी करेगा?
A) बंदी प्रत्यक्षीकरण
B) परमादेश
C) उत्प्रेषण रिट
D) अधिकार पृच्छा

उत्तरः (a)
व्याख्याः #बंदी_प्रत्यक्षीकरण के द्वारा न्यायालय किसी गिरफ्तार व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने हेतु आदेश देता है। यदि गिरफ्तारी का तरीका या कारण गैरकानूनी या असंतोषजनक हो, तो गिरफ्तार व्यक्ति को छोड़ने का आदेश भी दे सकता है।


प्रश्न 21:- किसी सार्वजनिक पदाधिकारी द्वारा अपने कानूनी और संवैधानिक दायित्वों का पालन न करने की स्थिति में न्यायालय कौन-सी रिट जारी करेगा?
A) अधिकार पृच्छा
B) परमादेश
C) उत्प्रेषण रिट
D) निषेध आदेश

उत्तरः (b)
व्याख्याः #परमादेश तब जारी किया जाता है जब न्यायालय को लगता है कि कोई सार्वजनिक पदाधिकारी अपने कानूनी और संवैधानिक दायित्वों का पालन नहीं कर रहा है और इससे किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।


प्रश्न 22:- किसी निचली अदालत द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण कर किसी मुकदमे की सुनवाई करने पर न्यायालय द्वारा कौन-सी रिट जारी की जाएगी?
A) परमादेश
B) निषेध आदेश
C) अधिकार पृच्छा
D) उत्प्रेषण रिट

उत्तरः (b)
व्याख्याः जब कोई #निचली अदालत अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण करके किसी मुकदमे की सुनवाई करती है तो ऊपर की अदालतें (उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय) उसे ऐसा करने से रोकने के लिये ‘निषेध आदेश’ जारी करती हैं।


प्रश्न 23:- यदि कोई व्यक्ति ऐसे पद पर नियुक्त हो गया है जिस पर उसका कोई कानूनी हक नहीं है तो ऐसी स्थिति में न्यायालय कौन-सी रिट जारी करेगा?
A) निषेध आदेश
B) उत्प्रेषण रिट
C) अधिकार पृच्छा
D) परमादेश

उत्तरः (c)
व्याख्याः जब #न्यायालय को लगता है कि कोई व्यक्ति ऐसे पद पर नियुक्त हो गया है जिस पर उसका कोई कानूनी हक नहीं है, तब न्यायालय ‘अधिकार पृच्छा आदेश’ के द्वारा उसे उस पद पर कार्य करने से रोक देता है।


प्रश्न 24:- जब कोई निचली अदालत या सरकारी अधिकारी बिना अधिकार के कोई कार्य करता है, तो न्यायालय कौन-सी रिट जारी करेगा?
A) अधिकार पृच्छा
B) उत्प्रेषण रिट
C) निषेध आदेश
D) परमादेश

उत्तरः (b)
व्याख्याः जब कोई #निचली_अदालत या सरकारी अधिकारी बिना अधिकार के कोई कार्य करता है, तो न्यायालय उसके समक्ष विचाराधीन मामले को उससे लेकर उत्प्रेषण द्वारा उसे ऊपर की अदालत या अधिकार को हस्तांतरित कर देता है।


प्रश्न 25:- राज्य के नीति निदेशक तत्त्वों के उद्देश्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
1. लोगों का कल्याण; सामाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय।
2. जीवन स्तर ऊँचा उठाना; संसाधनों का समान वितरण।
3. अंतर्राष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देना।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 1 और 3
C) केवल 2 और 3
D) उपरोक्त सभी।

उत्तरः (d)
व्याख्याः #संविधान के अनुच्छेद 36-51 तक राज्य के नीति-निदेशक सिद्धांतों का उल्लेख है नीति-निदेशक सिद्धांत वाद्योग्य नहीं हैं। अर्थात मूल अधिकार की तरह इसे न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
इसके निम्न उद्देश्य हैः-
लोगों का कल्याणः सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय।
जीवन स्तर को ऊँचा उठानाः संसाधनों का समान वितरण।
अन्तर्राष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देना।


प्रश्न 26:- राज्य की नीति-निदेशक तत्वों की नीतियों में कौन-कौन शामिल हैं?
1. समान नागरिक संहिता
2. मद्यपान निषेध
3. घरेलू उद्योगों को बढ़ावा
4. पशुओं को मारने पर रोक
5.ग्राम पंचायतों के गठन को प्रोत्साहन
कूटः
A) केवल 1, 2 और 4
B) केवल 2, 4 और 5
C) केवल 2 और 5
D) उपरोक्त सभी।

उत्तरः (d)
व्याख्याः दिये गए सभी विकल्प नीति-निर्देशक तत्वों की नीतियों में शामिल हैं।
समान नागरिक संहिता : अनुच्छेद-44
मद्यपान निषेध : अनुच्छेद-47
घरेलू उद्योग को बढ़ावा देना (कुटीर) : अनुच्छेद-43
पशुओं का वध करने पर रोक : अनुच्छेद-48
ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहन देना : अनुच्छेद-40


प्रश्न 27:- निम्नलिखित में से किन-किन अधिकारों के सबंध में न्यायालय में दावा नहीं किया जा सकता है?
1. महिलाओं और पुरुषों को समान काम हेतु समान मजदूरी देने के लिये।
2. आर्थिक शोषण के विरुद्ध।
3. काम की उपलब्धता के लिये।
4. 6 वर्ष से कम आयु के बालकों के लिये प्रारम्भिक बाल्यावस्था में देख-रेख और शिक्षा सुविधा देने हेतु।
5. सुविधापूर्ण जीवन यापन हेतु।
कूटः
A) केवल 1, 3 और 5
B) केवल 1, 4 और 5
C) केवल 1, 3, 4 और 5
D) उपरोक्त सभी।

उत्तरः (d)
व्याख्याः दिये गए सभी विकल्प #राज्यकेनीति-निर्देशक तत्त्वों में शामिल हैं। नीति निर्देशक तत्त्वों में शामिल किसी भी अधिकार को लागू करने हेतु न्यायालय में दावा नहीं किया जा सकता। इनके लागू करने संबंधी अधिकार को राज्य सरकारों के विवेक पर छोड़ा गया है।


प्रश्न 28:- भारत में नागरिकों के मौलिक कर्त्तव्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये-
1. इनको संविधान में 42वें संशोधन 1976, के माध्यम से जोड़ा गया था।
2. इनको लागू करने के संबंध में संविधान मौन है।
3. मौलिक कर्त्तव्यों के अनुपालन के आधार पर या उनकी शर्त पर संविधान हमें मौलिक अधिकार नहीं देता।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) केवल 2 और 3
D) उपरोक्त सभी

उत्तरः (d)
व्याख्याः #मौलिक_कर्त्तव्यों के संबंध में दिये गए तीनों कथन सत्य हैं। इनमें संविधान का पालन करना, देश की रक्षा करना, सभी नागरिकों में आपसी भाईचारे को बढ़ाने हेतु प्रयत्न तथा पर्यावरण की रक्षा करने संबंधी कर्तव्यों को शामिल किया गया है।
42वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1976 के द्वारा संविधान में भाग-4(क) और अनुच्छेद-51(क) जोड़ा गया। इसमें 10 मूल कर्त्तव्यों को शामिल किया गया, किन्तु 11वें मूल कर्त्तव्य को 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के द्वारा को जोड़ा गया। वर्तमान में कुल 11 मूल-कर्त्तव्य हैं।
भारत के संविधान में मूल कर्त्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति के सिफारिशों के आधार पर शामिल किया गया।


प्रश्न 29:- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
1. मौलिक अधिकार और नीति-निर्देशक तत्व दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
2. मौलिक अधिकार सरकार के लिये आदेशात्मक होते हैं वहीं नीति-निर्देशक तत्व केवल निर्देशात्मक होते हैं।
3. मौलिक अधिकार खास तौर पर व्यक्ति के अधिकारों को संरक्षित करते हैं, जबकि नीति-निर्देशक तत्व पूरे समाज की हित की बात करते हैं।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
A) केवल 1 और 2
B) केवल 1 और 3
C) केवल 2 और 3
D) उपरोक्त सभी

उत्तरः (d)
व्याख्याः दिये गए सभी कथन सत्य हैं। #मूल_अधिकार और राज्य के नीति-निदेशक तत्त्वों के बीच वरीयता को लेकर संसद एवं न्यायपालिका के बीच एक लम्बा संघर्ष चला। केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य, 1973 में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि मूल अधिकार और राज्य के नीति-निदेशक सिद्धांत एक-दूसरे का पूरक हैं। मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ, 1980 में भी सर्वोच्च न्यायालय ने इसे पुनः दोहराया किया।
मूल अधिकारों के उल्लंघन या हनन पर सर्वोच्च या उच्च न्यायालय रिट निकालकर सरकार को आदेश देता है, जबकि राज्य के नीति निदेशक तत्त्व सरकार के लिये निर्देश हैं कि इनके प्रावधानों को लागू करे, क्योंकि इसके पीछे जनता की नैतिक शक्ति है।
मूल अधिकार का संबंध व्यक्ति के अधिकारों के संरक्षण से है, जबकि नीति-निदेशक तत्त्वों का संबंध समाज के हितों के संरक्षण से है।


प्रश्न 30:- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
1. संसद संविधान के किसी भी अंश या प्रावधान में संशोधन कर सकती है।
2. न्यायालय ने संविधान की मूल-ढाँचागत विशेषताओं का सिद्धान्त केशवानन्द भारती मुकदमें के अपने निर्णय में दिया था।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (c)
व्याख्याः #केशवानन्द_भारती बनाम केरल राज्य वाद, 1973 में सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि संसद को संविधान के किसी अंश या प्रावधान में संशोधन करने की शक्ति है; किंतु संविधान के मूल-ढाँचे में संशोधन नहीं कर सकती।
संविधान के मूल ढाँचे का सिद्धांत सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य वाद, 1973 में पहली बार दिया।
संविधान की मूल ढाँचा के सिद्धांत को मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ वाद, 1980 में सर्वोच्च न्यायालय ने पुनः दोहराया।
सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि न्यायालय समय-समय पर बतलाएगा कि संविधान की मूल ढाँचा कौन-कौन हैं।


प्रश्न 31:- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
1. न्यायालय ने सम्पत्ति के अधिकार को संविधान के मूल ढाँचे का तत्व माना है।
2. 44वें संशोधन 1978 में सम्पत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से निकालकर अनुच्छेद 300 (A) के अन्तर्गत सामान्य कानूनी अधिकार बना दिया गया।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (a)
व्याख्याः 1973 में न्यायालय ने अपने निर्णय में सम्पत्ति के अधिकार को ‘#संविधानकेमूल_ढाँचे’ का तत्व नहीं माना और कहा कि संसद को संविधान का संशोधन करने का अधिकार है। 1978 में 44वें संविधान संशोधन के द्वारा सम्पत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से निकालकर संविधान के अनुच्छेद 300 (A) के अन्तर्गत सामान्य कानूनी अधिकार बना दिया।

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